संशोधित निपुण लक्ष्य, खेल आधरित ज्ञान पर जोर
संशोधित निपुण लक्ष्य- निपुण भारत मिशन के तहत प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा डॉ. एमकेएस सुंदरम ने निपुण लक्ष्य में बदलाव करते हुए विद्यार्थियों की पढ़ाई उसी के अनुसार कराने के निर्देश दिए हैं। इस मिशन का लक्ष्य 2026-27 तक निर्धारित किया गया है।
स्टीयरिंग कमेटियों का गठन
मिशन की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए प्रदेश स्तर से ब्लॉक स्तर तक स्टीयरिंग कमेटियां गठित की गई हैं:
- राज्य स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी:
- 14 सदस्यीय कमेटी का नेतृत्व मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह करेंगे।
- इसमें शामिल अन्य सदस्य:
- प्रमुख सचिव बेसिक शिक्षा
- अपर मुख्य सचिव पंचायतीराज
- अपर मुख्य सचिव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य
- महानिदेशक स्कूल शिक्षा
- बेसिक शिक्षा और माध्यमिक शिक्षा निदेशक
- जिला स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी:
- जिलाधिकारी की अध्यक्षता में 15 सदस्यीय जिला स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी का गठन किया गया है
- ब्लॉक स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी:
- खंड शिक्षा अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय ब्लॉक स्तरीय स्टीयरिंग कमेटी बनाई गई।
इस कदम का उद्देश्य मिशन के लक्ष्यों को समय पर प्राप्त करना और शिक्षा प्रणाली में सुधार करना है।

संशोधित निपुण लक्ष्य- निपुण भारत मिशन
शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा “निपुण भारत मिशन” हेतु निर्गत गाइडलाइन्स, राष्ट्रीय शिक्षा नीति. 2020 एवं नेशनल कॅरीकुलम फ्रेमवर्क (NCF-FS) के परिप्रेक्ष्य में निपुण भारत मिशन का क्रियान्वयन प्री-प्राइमरी (बालवाटिका) से कक्षा-2 (अर्थात् 08 वर्ष की आयु तक के लिये किये जाने का निर्णय लिया गया है। तद्नुसार शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा ‘निपुण भारत मिशन” हेतु संशोधित निपुण लक्ष्य जारी किये गये हैं। अतः निपुण भारत मिशन के संबंध में पूर्व में निर्गत समस्त शासनादेशों को अवक्रमित करते हुए निम्नवत् निर्देश जारी किये जाते हैं:-
निपुण भारत मिशन का विजन व उद्देश्य-
(1) वर्ष 2026-27 तक प्राथमिक कक्षाओं में सार्वभौमिक मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान प्राप्त करना तथा यह सुनिश्चित करना कि कक्षा-2 तक के सभी बच्चे निर्धारित दक्षताओं के अनुरूप समझ, स्पष्टता एवं सहज प्रवाह के साथ पढ़ एवं लिख सकें तथा संख्या ज्ञान में कक्षानुरूप निर्धारित दक्षतायें प्राप्त कर सकें।
(2) 3 से 8 वर्ष की आयु के बच्चों की अधिगम आवश्यकताओं, अधिगम-अंतराल और इसके संभावित कारणों की पहचान करना तथा स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए विभिन्न कार्यनीतियों की पहल करना।
(3) प्री-स्कूल से कक्षा-1 में सुचारू रूप से कक्षा-अंतरण सुनिश्चित किया जाना।
निपुण भारत मिशन के लक्ष्य
शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा निपुण भारत के अन्तर्गत निपुण लक्ष्य निर्धारित किये गये हैं, जो Non-Negotiable हैं। तद्नुसार बालवाटिका से कक्षा-2 के लिये वर्ष 2026-27 तक मूलभूत साक्षरता और संख्या ज्ञान का अपेक्षित अधिगम स्तर प्राप्त किया जाना है-
निपुण भारत मिशन के लिए संशोधित निपुण लक्ष्य
बालवाटिका (आयु 5-6) के लिए संशोधित निपुण लक्ष्य
| वर्ग | शिक्षण उद्देश्य |
|---|---|
| मौखिक भाषा | 1. मित्रों, सहपाठियों एवं शिक्षकों से बातचीत करना। 2. समझ एवं हाथ-हावभाव के साथ तुकांत शब्द/ कविताएँ सुनना। |
| पढ़ना | 1. किताबों को देखना और चित्रों की सहायता से कहानी पढ़ने का प्रयास करना। 2. कुछ परिचित दोहराए गए/तुकांत शब्दों को पहचानने और इंगित करने की शुरूआत करना (दृश्य शब्दों या खाद्य कंटेनर / रैपर पर छपे शब्द) 3. अक्षरों और संगत ध्वनियों को पहचानना। 4. दो से तीन अक्षर वाले सरल शब्दों को पढ़ना। |
| लेखन | 1. आत्म अभिव्यक्ति के लिए पेंसिल की मदद से रेखायें या चित्र बनाना तथा उनमें रंग भरना। 2. पहचानने योग्य अक्षरों को लिखने का प्रयास करना। 3. पेंसिल को ठीक से पकड़ना और पहचानने योग्य अक्षर बनाने के लिये उपयोग करना। 4. अपने लिखित नाम को पहचानना तथा साथ ही इसे लिखना |
| संख्यात्मक | 1. 09 तक वस्तुओं की गिनती करना तथा सम्बन्धित अंकों से इसका मिलान करना। 2. 09 तक के अंकों को पहचानना, पढना और लिखना। 3. सरल पैटर्न को पहचानना तथा नकल करना/बनाना एवं रंग भरना। 4. वस्तुओं की संख्या के सन्दर्भ में दो समूह की तुलना करना और अधिक/कम/बराबर आदि शब्दों का उपयोग करना। 5. संख्या/वस्तुओं/आकृतियों/घटनाओं को एक क्रम में व्यवस्थित करना। 6. वस्तुओं को उनकी अवलोकनीय विशेषताओं के आधार पर वर्गीकृत करना और वर्गीकरण के मानदंड को बताना। 7. अपने आस-पास की विभिन्न वस्तुओं के सन्दर्भ में तुलनात्मक शब्दावली का उपयोग करना जैसे-लम्बा, सबसे लम्बा, छोटा, सबसे छोटा, हल्का-भारी आदि। |
कक्षा 1 (आयु 6-7) के लिए संशोधित निपुण लक्ष्य
| वर्ग | शिक्षण उद्देश्य |
|---|---|
| मौखिक भाषा | 1. अपनी आवश्यकताओं, परिचित व्यक्तियों एवं परिवेश के बारे में मित्रों, कक्षा शिक्षकों के साथ बातचीत करना और प्रश्न करना। 2. कक्षा, विद्यालय और परिवेश में उपलब्ध प्रिंट सामग्री एवं इसकी विषयवस्तु पर बातचीत करना। 3. कविताओं एवं गीतों को हाव-भाव के साथ सुनाना। |
| पढ़ना | 1. कहानी सुनाने के सत्र के दौरान सक्रिय रूप से प्रतिभाग करना तथा कहानी सत्र के दौरान एवं पश्चात प्रश्नों का उत्तर देना तथा कठपुतलियों या अन्य सामग्रियों का प्रयाग करते हुये परिचित कहानी का अभिनय करना। 2. नये शब्द पढ़ने के लिए संगत ध्वनि का उपयोग करना। 3. आयु उपयुक्त अज्ञात पाठ में से कम से कम 4-5 सरल शब्द सहित छोटे-छोटे वाक्य पढ़ना। |
| लेखन | 1. परिचित संदर्भों (कहानी/कविता/पर्यावरण सम्बन्धी प्रिंट आदि) में प्रयोग होने वाले शब्दों में मात्राओं के साथ परिचित होना। 2. लिखकर या चित्र बनाकर अर्थ समझाना, अपने कार्यपत्रक या बधाई संदेश में नाम लिखना, पहचानने योग्य वस्तुओं/व्यक्तियों का चित्र बनाना। 3. शुद्ध वर्तनी युक्त शब्दों के लेखन के साथ-साथ ध्वनि-संकेतों का प्रयोग करना। 4. समझ के साथ 2 से 3 वाक्य लिखना। |
| गणित | 1. 20 तक वस्तुओं स्तुओं की गिनती एवं संख्या पहचानना। 2. अपने परिवेश, आकृतियों और संख्याओं में सरल पैटर्न की पहचान करना एवं आगे बढ़ाना। 3. दैनिक जीवन की स्थितियों में 9 तक संख्याओं के जोड़ और घटाव का उपयोग करना (योग 20 से अधिक न हो)। 4. अपने परिवेश में उडी आकृतियों (ठोस आकृतियों) के भौतिक गुणों का अवलोकन और वर्णन करना जैसे-गोल, समतल सतह, कोनों और किनारों की संख्या आदि। 5. अमानक एवं असमान इकाईयों जैसे-हाथ, पैर, उंगलियों आदि का उपयोग करके लम्बाई का अनुमान लगाना, समान इकाईयों जैसे-कप, चम्मच, मग आदि का उपयोग करके धारिता का मापन करना। 6. ₹20 तक की भारतीय मुद्रा (नोट एवं सिक्के) पहचानना। |
कक्षा 2 (आयु 7-8) के लिए संशोधित निपुण लक्ष्य
| वर्ग | शिक्षण उद्देश्य |
|---|---|
| मौखिक भाषा | 1. कक्षा में उपलब्ध प्रिंट सामग्री पर बातचीत एवं चर्चा करना। 2. प्रश्न पूछने एवं दूसरों की बात सुनने के लिए बातचीत में सम्मिलित होना। 3. हाव-भाव एवं उतार-चढ़ाव के साथ गीत एवं कवितायें सुनाना। 4. कहानियों/कविताओं/प्रिंट आदि हमें आने वाले परिचित शब्दों को दोहराना। |
| पढ़ना | 1. बच्चों के साहित्य एवं पाठ्य पुस्तकों से कहानियों को पढ़ना/वर्णन करना/फिर से सुनाना। 2. किसी दिए गए शब्द के अक्षरों से नए सार्थक सरल शब्द बनाना। 3. सरल शब्दों से युक्त 6 से 8 वाक्यों के आयु उपयुक्त अज्ञात पाठ को बोध, स्पष्टता और प्रवाह के साथ पढ़ना। |
| लेखन | 1. स्वयं की समझ एवं भावनाओं को व्यक्त रने के लिए छोटे/सरल वाक्यों को सही ढंग से लिखना। 2. पठनीय लेखन के साथ 4 से 5 छोटे वाक्य लिखना। |
| गणित | 1. 99 तक की वस्तुओं को गिनना और संख्या बोध होना। 2. विभिन्न आकृतियों और संख्याओं से नये पैटर्न बनाना। 3. दैनिक जीवन की स्थितियों में 99 तक की संख्याओं का जोड़ एवं घटाव करना (योग 99 से अधिक न हो) 4. गुणा को सरल जोड़ एवं भाग को समान वितरण/बंटवारे के रूप में हल करना तथा 2, 3 एवं 4 के गुणन तथ्यों (सारिणी) का निर्माण करना। 5. आयत, त्रिभुज, वृत्त, अंडाकार आदि जैसे 2-डी आकृतियों की पहचान करना एवं उनका वर्णन करना। 6. अमानक समान इकाईयों जैसे-रॉड, पेंसिल, धागा, कप, चम्मच, मग आदि का उपयोग करके लम्बाई/दूरी/क्षमता का अनुमान लगाना एवं मापना तथा तराजू का उपयोग करके वजन की तुलना करना। 7. दूर/पास, अंदर बाहर, ऊपर/नीचे, बाएं/दाएं, आगे/पीछे आदि जैसे स्थानिक शब्दावली का उपयोग करना। 8. ₹100 तक की मुद्रा के प्रयोग से सरल लेन-देन करना। |
यदि किसी और
संशोधित निपुण लक्ष्य तालिका
| वर्ग | कक्षा/आयु | शिक्षण उद्देश्य |
|---|---|---|
| मौखिक भाषा | बालवाटिका (आयु 5-6) | 1. मित्रों, सहपाठियों एवं शिक्षकों से बातचीत करना। 2. समझ एवं हाथ-हावभाव के साथ तुकांत शब्द/ कविताएँ सुनना। |
| कक्षा 1 (आयु 6-7) | 1. अपनी आवश्यकताओं, परिचित व्यक्तियों एवं परिवेश के बारे में मित्रों, कक्षा शिक्षकों के साथ बातचीत करना और प्रश्न करना। 2. कक्षा, विद्यालय और परिवेश में उपलब्ध प्रिंट सामग्री एवं इसकी विषयवस्तु पर बातचीत करना। 3. कविताओं एवं गीतों को हाव-भाव के साथ सुनाना। | |
| कक्षा 2 (आयु 7-8) | 1. कक्षा में उपलब्ध प्रिंट सामग्री पर बातचीत एवं चर्चा करना। 2. प्रश्न पूछने एवं दूसरों की बात सुनने के लिए बातचीत में सम्मिलित होना। 3. हाव-भाव एवं उतार-चढ़ाव के साथ गीत एवं कवितायें सुनाना। 4. कहानियों/कविताओं/प्रिंट आदि हमें आने वाले परिचित शब्दों को दोहराना। | |
| पढ़ना | बालवाटिका (आयु 5-6) | 1. किताबों को देखना और चित्रों की सहायता से कहानी पढ़ने का प्रयास करना। 2. कुछ परिचित दोहराए गए/तुकांत शब्दों को पहचानने और इंगित करने की शुरूआत करना (दृश्य शब्दों या खाद्य कंटेनर / रैपर पर छपे शब्द) 3. अक्षरों और संगत ध्वनियों को पहचानना। 4. दो से तीन अक्षर वाले सरल शब्दों को पढ़ना। |
| कक्षा 1 (आयु 6-7) | 1. कहानी सुनाने के सत्र के दौरान सक्रिय रूप से प्रतिभाग करना तथा कहानी सत्र के दौरान एवं पश्चात प्रश्नों का उत्तर देना तथा कठपुतलियों या अन्य सामग्रियों का प्रयाग करते हुये परिचित कहानी का अभिनय करना। 2. नये शब्द पढ़ने के लिए संगत ध्वनि का उपयोग करना। 3. आयु उपयुक्त अज्ञात पाठ में से कम से कम 4-5 सरल शब्द सहित छोटे-छोटे वाक्य पढ़ना। | |
| कक्षा 2 (आयु 7-8) | 1. बच्चों के साहित्य एवं पाठ्य पुस्तकों से कहानियों को पढ़ना/वर्णन करना/फिर से सुनाना। 2. किसी दिए गए शब्द के अक्षरों से नए सार्थक सरल शब्द बनाना। 3. सरल शब्दों से युक्त 6 से 8 वाक्यों के आयु उपयुक्त अज्ञात पाठ को बोध, स्पष्टता और प्रवाह के साथ पढ़ना। | |
| लेखन | बालवाटिका (आयु 5-6) | 1. आत्म अभिव्यक्ति के लिए पेंसिल की मदद से रेखायें या चित्र बनाना तथा उनमें रंग भरना। पहचानने योग्य अक्षरों को लिखने का प्रयास करना। 2. पेंसिल को ठीक से पकड़ना और पहचानने योग्य अक्षर बनाने के लिये उपयोग करना। 3. अपने लिखित नाम को पहचानना तथा साथ ही इसे लिखना |
| कक्षा 1 (आयु 6-7) | 1. परिचित संदर्भों (कहानी/कविता/पर्यावरण सम्बन्धी प्रिंट आदि) में प्रयोग होने वाले शब्दों में मात्राओं के साथ परिचित होना। 2. लिखकर या चित्र बनाकर अर्थ समझाना, अपने कार्यपत्रक या बधाई संदेश में नाम लिखना, 3. पहचानने योग्य वस्तुओं/व्यक्तियों का चित्र बनाना। 4. शुद्ध वर्तनी युक्त शब्दों के लेखन के साथ-साथ ध्वनि-संकेतों का प्रयोग करना। 5. समझ के साथ 2 से 3 वाक्य लिखना। | |
| कक्षा 2 (आयु 7-8) | 1. स्वयं की समझ एवं भावनाओं को व्यक्त रने के लिए छोटे/सरल वाक्यों को सही ढंग से लिखना। 2. पठनीय लेखन के साथ 4 से 5 छोटे वाक्य लिखना। | |
| गणित | बालवाटिका (आयु 5-6) | 09 तक वस्तुओं की गिनती करना तथा सम्बन्धित अंकों से इसका मिलान करना। 09 तक के अंकों को पहचानना, पढना और लिखना। सरल पैटर्न को पहचानना तथा नकल करना/बनाना एवं रंग भरना। वस्तुओं की संख्या के सन्दर्भ में दो समूह की तुलना करना और अधिक/कम/बराबर आदि शब्दों का उपयोग करना। संख्या/वस्तुओं/आकृतियों/घटनाओं को एक क्रम में व्यवस्थित करना। वस्तुओं को उनकी अवलोकनीय विशेषताओं के आधार पर वर्गीकृत करना और वर्गीकरण के मानदंड को बताना। अपने आस-पास की विभिन्न वस्तुओं के सन्दर्भ में तुलनात्मक शब्दावली का उपयोग करना जैसे-लम्बा, सबसे लम्बा, छोटा, सबसे छोटा, हल्का-भारी आदि। |
| कक्षा 1 (आयु 6-7) | 20 तक वस्तुओं स्तुओं की गिनती एवं संख्या पहचानना। अपने परिवेश, आकृतियों और संख्याओं में सरल पैटर्न की पहचान करना एवं आगे बढ़ाना। दैनिक जीवन की स्थितियों में 9 तक संख्याओं के जोड़ और घटाव का उपयोग करना (योग 20 से अधिक न हो)। अपने परिवेश में उडी आकृतियों (ठोस आकृतियों) के भौतिक गुणों का अवलोकन और वर्णन करना जैसे-गोल, समतल सतह, कोनों और किनारों की संख्या आदि। अमानक एवं असमान इकाईयों जैसे-हाथ, पैर, उंगलियों आदि का उपयोग करके लम्बाई का अनुमान लगाना, समान इकाईयों जैसे-कप, चम्मच, मग आदि का उपयोग करके धारिता का मापन करना। ₹20 तक की भारतीय मुद्रा (नोट एवं सिक्के) पहचानना। | |
| कक्षा 2 (आयु 7-8) | 99 तक की वस्तुओं को गिनना और संख्या बोध होना। विभिन्न आकृतियों और संख्याओं से नये पैटर्न बनाना। दैनिक जीवन की स्थितियों में 99 तक की संख्याओं का जोड़ एवं घटाव करना (योग 99 से अधिक न हो) गुणा को सरल जोड़ एवं भाग को समान वितरण/बंटवारे के रूप में हल करना तथा 2, 3 एवं 4 के गुणन तथ्यों (सारिणी) का निर्माण करना। आयत, त्रिभुज, वृत्त, अंडाकार आदि जैसे 2-डी आकृतियों की पहचान करना एवं उनका वर्णन करना। अमानक समान इकाईयों जैसे-रॉड, पेंसिल, धागा, कप, चम्मच, मग आदि का उपयोग करके लम्बाई/दूरी/क्षमता का अनुमान लगाना एवं मापना तथा तराजू का उपयोग करके वजन की तुलना करना। दूर/पास, अंदर बाहर, ऊपर/नीचे, बाएं/दाएं, आगे/पीछे आदि जैसे स्थानिक शब्दावली का उपयोग करना। ₹100 तक की मुद्रा के प्रयोग से सरल लेन-देन करना। |
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