टीजीटी 2013 चयनितों की नियुक्ति पत्र की मांग पर कोर्ट का रुख: जानें पूरा मामला
टीजीटी 2013 चयनितों ने नियुक्ति पत्र के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। चयनित अभ्यर्थियों की याचिका पर सुनवाई
प्रयागराज। टीजीटी 2013 की लिखित परीक्षा और साक्षात्कार प्रक्रिया के बाद भी 307 चयनित अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र न मिलने के कारण यह मामला एक बार फिर चर्चा में है। इस संदर्भ में चयनित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की है। कोर्ट ने उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग से जवाबी हलफनामा तलब किया है।
इस याचिका को राजीव कुमार व अन्य की लंबित याचिका के साथ छह हफ्ते बाद सूचीबद्ध करने का आदेश दिया गया है।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला टीजीटी 2013 की लिखित परीक्षा और साक्षात्कार से संबंधित है। आइए, इसके प्रमुख बिंदुओं को समझते हैं:
मुख्य बिंदु
- टीजीटी 2013 परीक्षा और साक्षात्कार: प्रक्रिया 2015-2016 में पूरी हुई।
- 2018 का कोर्ट आदेश: सभी विषयों के विज्ञापित पदों पर अंतिम चयन सूची जारी करने का निर्देश।
- चयन सूची विवाद: 2017 में विज्ञापित पदों में कटौती से विवाद उत्पन्न।
- 307 चयनितों की समस्या: नियुक्ति पत्र और विद्यालय आवंटन में देरी।
- कोर्ट का ताजा आदेश: छह हफ्ते में मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश।
कोर्ट का आदेश और चयन प्रक्रिया
2018 में दाखिल याचिका पर हाईकोर्ट ने सभी विषयों के विज्ञापित पदों के आधार पर अंतिम चयन सूची जारी करने और विद्यालय आवंटित करने का आदेश दिया था। इसके अनुपालन में चयन आयोग ने:
- 1167 चयनित अभ्यर्थियों का पैनल जारी किया।
- इनमें से 860 अभ्यर्थियों को नियुक्ति पत्र जारी कर दिया गया।
- 307 चयनित अभ्यर्थियों को न नियुक्ति पत्र मिला और न ही विद्यालय आवंटन।
याचिकाकर्ताओं की मांग
307 चयनित अभ्यर्थियों का कहना है कि:
- उनकी मेहनत और चयन प्रक्रिया के बावजूद उन्हें नियुक्ति पत्र नहीं मिला।
- उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग को पहले भी इस संबंध में प्रत्यावेदन दिया गया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कोर्ट का हस्तक्षेप क्यों जरूरी?
यह मामला केवल 307 अभ्यर्थियों की नियुक्ति का नहीं है, बल्कि चयन प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता का भी सवाल है। न्यायालय का हस्तक्षेप इस मुद्दे का समाधान निकालने और चयन आयोग को जवाबदेह बनाने के लिए आवश्यक है।
टीजीटी 2013 के चयनित अभ्यर्थियों का यह मामला शिक्षा क्षेत्र की प्रशासनिक चुनौतियों को उजागर करता है। कोर्ट का आगामी आदेश न केवल इन 307 अभ्यर्थियों के भविष्य को निर्धारित करेगा, बल्कि यह भी सुनिश्चित करेगा कि चयन प्रक्रिया में किसी प्रकार की गड़बड़ी न हो।
